कमला कॉलेज में RUSA 2.0 के अंतर्गत "लैंगिक समावेशन एवं समानता पहल संवेदीकरण" पर
सात दिवसीय Faculty Development Program (FDP) का आयोजन
शासकीय कमलादेवी राठी महिला महाविद्यालय, राजनांदगांवमें दिनांक 9 मार्च 2026 से 15मार्च 2026 तक सात दिवसीय FacultyDevelopment Program (FDP) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग (Psychology Department) एवं WomenCell के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस कार्यक्रम के आयोजन में महाविद्यालयकी प्राचार्या डॉ. अंजली औधिया के मार्गदर्शन में संपूर्ण महाविद्यालयपरिवार का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। विशेष रूप से मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार सोनबेर के नेतृत्व में इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई।
सात दिवसीय इस कार्यक्रम में महाविद्यालयके समस्त प्राध्यापकगण के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयोंसे भी अनेक प्राध्यापक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे, जिन्होंने विभिन्न विषयों पर आयोजित व्याख्यानोंको सुनकर महत्वपूर्ण ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त किया।
पहला दिन
कार्यक्रम के प्रथम दिवस, *9 मार्च 2026*को महिला दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजली औधिया समस्त प्राध्यापकगणएवं छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
प्रथम दिवस की मुख्य वक्ता आदरणीय डॉ. सुनीता पाठक थीं। उन्होंने अपने व्याख्यान में *Gender Sensitization and Gender Equality* जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य के भीतर प्रश्न उत्पन्न नहीं होते, तब तक सत्य की पहचान संभव नहीं होती। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि समाज में पुरुष वर्ग द्वारा महिला वर्ग को नियंत्रित करने की प्रवृत्ति क्यों विकसित हुई और इस मानसिकता को बदलने की आवश्यकता क्यों है।
उनका व्याख्यान अत्यंत रोचक, चिंतनशील एवं ज्ञानवर्धक था, जिसने उपस्थित सभी प्रतिभागियोंको गहन विचार करने के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात सत्यरंजन भट्टाचार्य द्वारा एक रोचक गतिविधि आयोजित करवाई गई,जिसमें प्रतिभागियोंने उत्साहपूर्वकभाग लिया।
दूसरा दिन
कार्यक्रम के दूसरे दिन का प्रारंभ भी विधिवत रूप से किया गया। इस दिन की मुख्य वक्ता *डॉ. आशा शुक्ला* थीं। उन्होंने अपने विचार अत्यंत गंभीरता एवं संवेदनशीलताके साथ प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि विश्व की आधी आबादी महिलाएँ हैं और शेष आधी आबादी उनके द्वारा जन्मे बच्चे हैं। एक माँ को पुत्र को जन्म देने में जितनी पीड़ा होती है, उतनी ही पीड़ा पुत्री को जन्म देने में भी होती है। इसलिए समाज में पुत्र और पुत्री के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने *HumanTrafficking* जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर भी प्रकाश डाला और बताया कि यह समस्या आज अत्यंत चिंताजनक रूप धारण कर चुकी है,जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह विचार भी प्रस्तुत किया कि सबसे पहले एक स्त्री *एक मानव* है और उसे उसी दृष्टि से सम्मान मिलना चाहिए।
गतिविधि सत्र में *श्रीमती सिद्धि मिरानी* ने *Breast Cancer* से संबंधित अनेक भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।
तीसरा दिन
कार्यक्रम के तीसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में *डॉ. सोमाली गुप्ता (एस.डी.एन. शासकीय महाविद्यालय, अर्जुन्दा)* को आमंत्रित किया गया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में *P.O.S.H. (Prevention of Sexual Harassment)* से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए किस प्रकार *InternalCommittee* कार्य करती है और उसके क्या-क्या दायित्व होते हैं।
उन्होंने यौन उत्पीड़न के विभिन्न प्रकारों की जानकारी देते हुए इसके प्रति जागरूकता तथा रोकथाम के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की।
इस सत्र के पश्चात *Open Mic Activity* का आयोजन किया गया, जिसमें प्राध्यापकोंने अपने विचार विषय से संबंधित रूप में प्रस्तुत किए।
चौथा दिन
कार्यक्रम के चौथे दिन मुख्य वक्ता के रूप में *डॉ. भूपेन्द्र चक्रवांदे (Faculty of Law, जे. योगानंदम कॉलेज,रायपुर)* उपस्थित रहे।
उन्होंने प्रतिभागियोंको *SexualHarassment से संबंधित कानूनी प्रावधानों* की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न क्या है,इसके कितने प्रकार होते हैं तथा कार्यस्थल पर महिलाओं और बालिकाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न से बचाव के लिए कानून किस प्रकार सहायता करता है।
उन्होंने VishakhaGuidelines तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी।
इसके पश्चात गतिविधि सत्र में डॉ. मोना माखीजा ने जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को एक विशेष कार्य दिया, जिससे उन्हें अपने जीवन के अनुभवों पर विचार करने का अवसर मिला।
तत्पश्चात प्रशांत मेषराम (CRC राजनांदगांव) ने दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं, प्रशिक्षण एवं योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
पांचवा दिन
कार्यक्रम के पाँचवें दिन मुख्य वक्ता के रूप में *“TheSolar Man” के नाम से प्रसिद्ध श्री शैलेंद्र कुमार शुक्ला* उपस्थित रहे।
उन्होंने अपने प्रेरणादायक व्याख्यान में बताया कि भारत आज *सौर ऊर्जा* के क्षेत्र में विश्व स्तर पर तेजी से प्रगति कर रहा है तथा इस क्षेत्र में *छत्तीसगढ़* भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसके पश्चात *मिलेट लेडी आशा जी* ने मिलेट्स (मोटे अनाज) की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस दिन के विशेष सत्र में *सुश्री रवीना जी* तथा *श्रीमती विद्या राजपूत जी* ने तृतीय लिंग (TransgenderCommunity) के महत्व एवं उनके अधिकारों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने हमारे वेदों और पुराणों में वर्णित *गर्गी, बृहन्नला और शिखंडी* जैसे उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि भारतीय संस्कृति में तृतीय लिंग का उल्लेख प्राचीन काल से मिलता है।
श्रीमती विद्या राजपूत जी ने अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि लंबे प्रयासों के बाद वर्ष *2014 से व्यापम परीक्षाओं में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए 2% आरक्षण* लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूपअनेक ट्रांसजेंडरव्यक्तियों को पुलिस सेवा में भी अवसर प्राप्त हुए।
इसी दिन महाविद्यालय में छात्राओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से *Exhibition-cum-Mela*का आयोजन भी किया गया,जिसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
छठा दिन
कार्यक्रम के छठे दिन मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध चिकित्सक एवं समाजसेवी *डॉ. पुखराज बाफना* को आमंत्रित किया गया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में बच्चों एवं युवाओं के *शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य* के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए बच्चों में नैतिक मूल्यों,अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं, बल्कि समाज के *मार्गदर्शक एवं चरित्र निर्माता* होते हैं।
उनका व्याख्यान अत्यंत प्रेरणादायकरहा और सभी प्रतिभागियोंको जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।
समापन दिवस
सातवें और अंतिम दिवस का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के समापन सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें महाविद्यालयकी प्राचार्या *डॉ. अंजली औधिया*,सभी प्राध्यापकगणएवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
समापन सत्र में सात दिनों तक आयोजित सभी व्याख्यानों एवं गतिविधियों का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इन सात दिनों में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने *लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, कानूनी जागरूकता, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक समावेशन एवं तृतीय लिंग के अधिकारों* जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए *मनोविज्ञान विभाग एवं WomenCell* की विशेष भूमिका रही। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और उसे सफल बनाने में *मनोविज्ञान विभागाध्यक्षडॉ. बसंत कुमार सोनबर* का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समापन अवसर पर प्राचार्या *डॉ. अंजली औधिया * ने सभी अतिथियों, वक्ताओं,आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के बौद्धिक विकास और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में सभी प्रतिभागियोंको प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी गई।
इस प्रकार यह *सात दिवसीय FacultyDevelopment Program* अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।